Essay On Laziness In Hindi

दैव-दैव आलसी पुकारा

     आलसी ही दैव (भाग्य) का सहारा लेता है – भाग्य आलसियों के सहारे जीवित रहता है | जो लोग परिश्रम करने में मन चुराते हैं, वही भाग्य का दामन थामने हैं | परिशमी लोग अपना भाग्य स्वयं बनाते हैं | वे कठोर परिश्रमकरके पाने लिए रोटी, कपड़ा, मकान जुटा लेतें हैं | जबकि आलसी लोग कहते हैं – ‘क्या करें’, हमारी किस्मत में यही बदा था | ’एक प्रसिद्ध कथन है – ‘समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को नहीं मिलता |’ आलसी लोग इस उक्ति का सहारा लेकर बैठ जाते हैं | वे कहते हैं – जब समय आयेगा, भाग्य जागेगा तो साडी चीज़ें अपने-आप मिल जाएँगी | इसलिए वे भूलकर भी परिशाम नहीं करते |

भाग्यवादी निकम्मा होता है – भाग्य के भरोसे बैठे रहने वाला व्यक्ति निकम्मा होता है | वह हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाता है | उसे भ्रम रहता है कि जो कुछ होगा, किसी और शक्ति के चाहने पर होगा | उसके करने से कुछ नहीं हो सकता | अत: भाग्यवान उसे निकम्मा बना देता है |

विघ्न-बाधायों से डरता है, उसका मुकाबला करने से बचता है – वास्तव में उसे कठोर परिश्रम करने में डर लगता है | भूखा होने पर भी वः सोचता है कि पेड़ पर चढ़कर फल कौन तोड़े, फावड़ा उठाकर मिट्टी कौन खोदे, कौन दिन-भर रेहड़ी पर संतरे बेचता फिरे ! उसकी यही सोच उसे निकम्मा बना देती है | यही सोच उसे मुसीबतों का मुकाबला करने से रोकती है | यदि मनुष्य यह सोच ले कि परिश्रम करने से मुझे रोटी अवश्य मिलेगी, तो वह हँसते-हँसते  फावड़ा चला लेगा, खुसी से पेड़ पर चढ़ जाएगा, उत्साह-पृवक दिन-भर संतरे बेच लेगा और विशाल ज्ञान-राशि को रचा-पचा जाएगा |

निराश, उदासीन और पराश्रित रहता है – भाग्यवादी का दुभाग्य यह है कि वह हमेशा निराश, उदासीन और पराश्रित रहता है | उसे कर्म करने के उत्साह का अनुभव नहीं होता | उसे अपने परिश्रम के प्राप्त फल का सुख नहीं मिल पाता | उसके जीवन में कोई आशा अंकुरित नहीं हो पाती | इसलिए वः सदा भूखा-नंगा, गरीब, निराश और उदासीन रहता है | भूख के मारे उसे औरों से माँगने की आदत पड़ जाती है | इसलिए वह पराश्रित हो जाता है |

परिश्रम सौभाग्य का निर्माता है – सौभाग्य का वास्तविक आधार है – परिश्रम | परिश्रमी व्यक्ति अपना सोया भाग्य जगाकर सौभाग्यशाली बन जाते हैं | वास्तव में संसार में जितने भी निर्माण हुए हैं, वे परिश्रम की ही कहानी कहते हैं | जितनी फसलें उगती हैं, जितने वस्त्र-आभूषण बनते हैं, जितने भवन उद्योग बनते हैं, सब परिश्रम से ही बनते हैं | अत: परिश्रम सौभाग्य का जनक है और आलस्य दुभार्ग्य का | इसलिए कहा गया है –

जो सोया है, वह कलियुग है |

जो बैठ गया, वह द्वापर है |

जो खड़ा हो गया, त्रेता है |

जो चल पड़ा, वह सतयुग है |

     अत: ‘चरैवैति चरैवैति’| चलते रहो, चलते रहो |

June 28, 2016evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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    आलस पर काबू

    आलस्य मनुष्यका सबसे बड़ा शत्रु है। आलस्य ऐसा दोष है जिससे मनुष्य अपने वर्तमान और भविष्य दोनों को नष्ट कर देता है। आलस्‍य समय-समय पर सभी को प्रभावित करता है। और हर कोई इस आलसीपन को दूर करने के उपायों को ढूढ़ते रहते हैं। आलस्‍य को दूर करना सफलता हासिल करने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। यहां पर दिये उपाय चीजों को सही तरीके से करने और आलस्‍य को अपने रास्‍ते से दूर करने में मददगार साबित हो सकती है।

  • 2

    टाल-मटोल छोड़ें

    टाल मटोल वास्तव में आलस का ही प्रतिरूप है। जब भी कोई काम आता है, हम उसे यह कहकर टाल देते हैं कि इसे थोड़ी देर बाद कर लूंगा। लेकिन यह हमारी आदत लत बन जाती है। आज का काम कल पर और कल का काम परसों पर डालने वाली आदत को छोड़कर हम इस लत से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं।

  • 3

    लाभ और परिणाम के बारे में सोचें

    अपने कार्यों के लाभ पर ध्‍यान केंद्रित करें और आलस्‍य पर काबू पाने के लिए खुद को पुरस्‍कृत करें। इसके अलावा इस बारे में सोचें कि आलस्‍य का शिकार होने पर क्‍या-क्‍या हो सकता है। अपने आपको प्रेरित करने के लिए उन सभी पर नजर रखें।

  • 4

    व्यवस्थित तरीके से करें

    एक ही समय में एक साथ बहुत सारे काम करने की स्थिति में आप खुद को हतोत्साहित महसूस करने लगते हैं। लेकिन इन सब चीजों को व्‍यवस्थित कर आप काम को आसान बना सकते हैं। कुछ भी हो सभी के लिए आयोजन बहुत जरूरी होता है।

  • 5

    प्रारंभ

    शुरुआत करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन शुरूआत के लिए और चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए स्‍वयं को प्रेरित करें। आप दैनिक लक्ष्य बना कर और ध्‍यान को भटकने से रोककर शुरूआत के लिए स्‍वयं को तैयार कर सकते हैं। साथ ही खुद को बताओ कि आप शुरूआत के लिये तैयार है।

  • 6

    सोने का समय Sleep schedule

    सोना का एक नियमित शेड्यूल होना बहुत महत्‍वपूर्ण है। यह पता करना बहुत जरूरी है कि आपको रात में पर्याप्‍त नींद आती है या नहीं। सप्ताहांत सहित, प्रत्येक दिन एक ही समय में बिस्तर पर सोने और एक ही समय पर उठने की आदत बनाये। कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। समय के साथ, आप इतने सक्षम हो जायेगें कि बिना अलार्म घड़ी के स्‍वयं ही यह सब कर पायेगें।

  • 7

    हल्‍का भोजन


    एक भारी यानी फैट, शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन से आपको आलस महसूस होता है। इसके अलावा आपको ग्लाइसेमिक खाद्य पदार्थों से भी दूर रहना चाहिए क्‍योंकि यह रक्त शर्करा के बढ़ने के साथ आपमें अस्‍थायी ऊर्जा को बढ़ावा देता है। ऐसी ऊर्जा कुछ मिनट में दूर होकर आपको थकान महसूस करवाती है।

  • 8

    एक्‍सरसाइज


    एक्‍सरसाइज, दिमाग सहित शरीर के हर हिस्‍से के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। जब आप नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करते हैं तो आप खुद को अधिक ऊर्जावान महसूस करते है। रक्त परिसंचरण बेहतर और चयापचय कार्यों भी अच्‍छी तरह से होते है। इसलिए नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करने की कोशिश करें, आप सिर्फ 15 मिनट की एक्‍सरसाइज को अपने रूटीन में शामिल करें।

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    टास्‍क को छोटा करें

    अपने नियत कार्य को पूरा करने के लिए समय ले, खासतौर पर यदि अगर आपका टास्‍क बहुत बड़ा है तो। छोटी चीजों बहुत अधिक सुलभ और अधिक साध्‍य लगती हैं। नियत कार्य को भागों में तोड़कर आप उस पर अच्‍छे से नियंत्रण पा सकते हैं और यह दिखने में भी बहुत आरामदेह लगती है।

  • 10

    प्रेरणा के लिए सफल लोगों को देखें

    सफल लोगों को आलस्‍य कभी जीत नहीं सकता है। आप खुद को कुछ तरीकों से ऐसे लोगों के साथ संबद्ध करने का प्रयास करें। जानें कि दैनिक चुनौतियों के साथ लड़कर भी सफलता को कैसे हासिल करते हैं और वह किस तरह आलस को अपने दूर करने में कामयाब होते हैं।

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